अपने नेताओं पर लगे गंभीर आरोपों पर जवाब दे कांग्रेस अध्यक्ष
देहरादून। भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान ने बद्रीनाथ मन्दिर मे चढ़ावा चोरी मे उच्च स्तरीय समिति जांच कर रही है और एक आरोपी को गिरफ्तार भी किया जा चुका है, लेकिन कांग्रेस उसमे भी अवसर तलाश रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा की कार्यशैली पर सवाल उठाने का कांग्रेस को नैतिक अधिकार नही है।
दूसरों पर उंगली उठाने से पहले कांग्रेस को अपने नेताओं के कार्यकाल पर लगे गंभीर सवालों का जवाब देवभूमि की जनता को देना चाहिए।
चौहान ने कहा कि जब-जब कांग्रेस को सत्ता मिली, तब-तब मंदिरों की व्यवस्थाओं, धार्मिक संस्थाओं और श्रद्धालुओं की आस्था पर सवाल खड़े हुए। आज वही कांग्रेस नैतिकता का मुखौटा पहनकर भाजपा को उपदेश देने निकली है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सबसे पहले यह स्पष्ट करे कि वर्ष 2012 से 2017 के बीच, जब गोदियाल बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष थे, तब उनके कार्यकाल को लेकर गंभीर शिकायतें क्यों दर्ज हुईं? यदि सब कुछ पूरी तरह पारदर्शी और नियमसम्मत था, तो तत्कालीन मंदिर समिति के सदस्य डिमरी को लिखित शिकायत क्यों करनी पड़ी? यदि कोई अनियमितता नहीं थी, तो जांच के आदेश क्यों दिए गए और यदि जांच हुई, तो कांग्रेस आज तक पूरी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग क्यों नहीं करती।
उन्होंने कहा कि क्या गणेश गोदियाल के कार्यकाल में नियुक्तियों, वित्तीय स्वीकृतियों और प्रशासनिक निर्णयों पर सवाल नहीं उठे? यदि नहीं उठे, तो शिकायतें और जांच किस आधार पर हुईं? और यदि उठे, तो कांग्रेस देवभूमि की जनता से सच्चाई क्यों छिपा रही है?
कांग्रेस का राजनीतिक चरित्र भी बड़ा विचित्र है। अपने नेताओं पर सवाल उठें तो कहती है, “जांच होने दीजिए।” लेकिन भाजपा पर आरोप लगाने हों तो जांच से पहले ही फैसला भी सुना देती है, सजा भी तय कर देती है और प्रेस कॉन्फ्रेंस भी कर लेती है। यही कांग्रेस का दोहरा चरित्र है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस यह भी बताए कि प्रमोद नौटियाल को वर्ष 2014 में नियमित करने का निर्णय किस सरकार ने लिया? ‘व्यक्तिगत सहायक, अध्यक्ष कार्यालय’ का नया पद किसने सृजित किया? उन्हें तत्कालीन अध्यक्ष का निजी में नोटिस जारी किए गए थे। कांग्रेस को बताना चाहिए कि इन नोटिसों पर जनता के सामने क्या स्पष्टीकरण दिया गया। यदि सब कुछ स्पष्ट था, तो तत्काल जवाब देने के बजाय चुनाव के बाद जवाब देने की बात क्यों कही गई? कांग्रेस इस पूरे मामले पर अपनी आधिकारिक स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं करती है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस “चोरों की कोई जाति नहीं होती” कहकर मुद्दे को भटकाने की कोशिश कर रही है। भाजपा ने कभी किसी दोषी को जाति या पद के आधार पर बचाने की बात नहीं की। भाजपा कहती है कि दोषी को सजा मिले। लेकिन कांग्रेस पूरे तीर्थपुरोहित समाज की प्रतिष्ठा को संदेह के घेरे में खड़ा कर रही है। कांग्रेस की लड़ाई भ्रष्टाचार से है या सनातन से यह स्पष्ट करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस का इतिहास भी सबके सामने है। कभी राम मंदिर पर विरोध की राजनीति, कभी सनातन पर अपमानजनक टिप्पणियों पर चुप्पी, कभी हिंदू आस्था को संदेह के घेरे में खड़ा करना और अब बद्रीनाथ धाम जैसे पवित्र विषय पर भी राजनीतिक रोटियां सेंकने का प्रयास। यह केवल राजनीतिक अवसरवाद नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का अपमान है। घोटाले , सनातन, आस्था से खिलवाड़, तुष्टिकरण, देवभूमि में मुस्लिम यूनिवर्सिटी की पैरवी करना और जब भ्रष्टाचार उजागर हो जाए तो लीपापोती कर जांच की फाइलों को ठंडे बस्ते में डाल देना यही कांग्रेस का मॉडल रहा है।
चौहान ने कहा कि भाजपा की नीति बिल्कुल स्पष्ट है। आस्था सर्वोपरि है, कानून सर्वोपरि है। किसी भी प्रकार की अनियमितता पर निष्पक्ष जांच होगी, दोषी पर कार्रवाई होगी और किसी को भी कानून से ऊपर नहीं माना जाएगा। यही भाजपा और कांग्रेस की राजनीति का सबसे बड़ा अंतर है, भाजपा कार्रवाई करती है, कांग्रेस आरोपों पर पर्दा डालती है और सवाल उठने पर चुप्पी साध लेती है।










